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जल-तरंग Contest

Posted On: 27 Jan, 2014 Others में

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जल-तरंग हुई भंग-भंग
मेरा काँप उठा हर अंग-अंग
घनघोर घटा आई संग-संग
उसे देख हुआ मैं दंग-दंग
जब जल-तरंग ने बदला वह ढंग
लगा हो चुकी घोषित है जंग
उड़े बहुतेरों के रंग-रंग
अब बची किसी में न उमंग
जब जल-तरंग होके दबंग
घुल गई फ़िज़ा में बनके रंग
उसकी ध्वनि हुई धड़-धड़ंग
लगा बाजने अबकी मृदंग
जब गिरी जमीं पे अंतिम तरंग
लगा थम गयी है जल-तरंग
दिखने लगी उड़ती पतंग
होने लगी वह गली तंग-तंग
छंटने लगी धुंध अंतरंग
बहने लगी हवा मंद-मंद
गूंजी सदा आकाश में
एक दिन उठेगी फिर जल-तरंग।

जल-तरंग हुई भंग-भंग

मेरा काँप उठा हर अंग-अंग

घनघोर घटा आई संग-संग

उसे देख हुआ मैं दंग-दंग

जब जल-तरंग ने बदला वह ढंग

लगा हो चुकी घोषित है जंग

उड़े बहुतेरों के रंग-रंग

अब बची किसी में न उमंग

जब जल-तरंग होके दबंग

घुल गई फ़िज़ा में बनके रंग

उसकी ध्वनि हुई धड़-धड़ंग

लगा बाजने अबकी मृदंग

जब गिरी जमीं पे अंतिम तरंग

लगा थम गयी है जल-तरंग

दिखने लगी उड़ती पतंग

होने लगी वह गली तंग-तंग

छंटने लगी धुंध अंतरंग

बहने लगी हवा मंद-मंद

गूंजी सदा आकाश में

एक दिन उठेगी फिर जल-तरंग।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
January 30, 2014

जब जल-तरंग होके दबंग घुल गई फ़िज़ा में बनके रंग उसकी ध्वनि हुई धड़-धड़ंग लगा बाजने अबकी मृदंग जब गिरी जमीं पे अंतिम तरंग लगा थम गयी है जल-तरंग दिखने लगी उड़ती पतंग होने लगी वह गली तंग-तंग छंटने लगी धुंध अंतरंग बहने लगी हवा मंद-मंद गूंजी सदा आकाश में एक दिन उठेगी फिर जल-तरंग। सुंदर प्रस्तुति

    Anuj Diwakar के द्वारा
    January 31, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद् सारस्वत जी !

vikaskumar के द्वारा
January 30, 2014

सुन्दर प्रयास .

    Anuj Diwakar के द्वारा
    January 30, 2014

    धन्यवाद् !


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