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दास्तान-ए-दिल (Contest)

Posted On: 13 Jan, 2014 Others में

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कभी हमें अपना
बनाकर तो देखो
दास्तान-ए-दिल बयां
करके तो देखो
हसरतें पूरी कर दूंगा एक पल में तेरी
हमें अपनी चाहत बता कर तो देखो

तेरे साथ न रहकर भी
तेरे साथ रहेंगें
तेरे चेहरे को तसव्वुर
में लाते रहेंगें
कर दूंगा मैं तेरे नाम अपनी ज़िंदगी
हमे अपनी रज़ा बता कर तो देखो

कर देंगे सुराख़
आसमां में भी
डूब निकलेंगे आग
के दरिया से भी
बना लेंगे हम तूफानों में भी आशियाना
हमे अपना तिनका बना कर तो देखो

जी लेंगें तेरे साथ
होने के अहसास पर
मर मिटेंगे तेरी आँखों
के इशारों पर
गर हो कोई सजा इश्क़ करने की
तो वह सजा हमे बताकर तो देखो।

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindrapandey के द्वारा
January 17, 2014

प्रसंसनीय

    Anuj Diwakar के द्वारा
    January 18, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद् सर जी

yogi sarswat के द्वारा
January 17, 2014

कोशिश बेहतर है

    Anuj Diwakar के द्वारा
    January 18, 2014

    आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए धन्यवाद् सर

Santlal Karun के द्वारा
January 16, 2014

एक तरफा प्यार की बयां-जैसी भावात्मक कविता;हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    Anuj Diwakar के द्वारा
    January 17, 2014

    धन्यवाद् सर !


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